04

“Before The Goodbye”

Chapter 4

समय कभी किसी के लिए नहीं रुकता।

ना बचपन के लिए।
ना आदतों के लिए।
और ना ही उन भावनाओं के लिए जिन्हें कोई नाम नहीं दे पाता।

चार साल बीत चुके थे।

अब Advay Wadhwa चौदह साल का हो चुका था।

उसकी height बढ़ चुकी थी।
चेहरे की softness अब sharpness में बदलने लगी थी।
आँखों में उम्र से ज्यादा ठंडापन आ गया था।

लेकिन एक चीज़ बिल्कुल नहीं बदली थी—

Vriddhi Rathore के लिए उसकी obsession।

बल्कि… वो और गहरी हो चुकी थी।

“भैया!”

छह साल की वृद्धि हँसते हुए उसकी तरफ भागी।

उसके हाथ में crayons थे और चेहरे पर रंग लगे हुए थे।

अद्वय नीचे झुका ताकि वो गिर ना जाए।

अगले ही पल वृद्धि उसकी बाँहों में थी।

“देखो!”
उसने excited होकर अपनी drawing दिखाई।

अद्वय ने paper लिया।

Drawing बेहद messy थी।
एक बड़ा घर।
एक stick-man।
और उसके पास छोटी-सी लड़की।

“ये कौन है?”

वृद्धि तुरंत मुस्कुराई। “मैं… और आप।”

उसकी आँखें कुछ सेकंड drawing पर टिकी रहीं।

फिर बहुत धीरे…

उसके होंठों पर हल्की-सी smile आई।

वो smile जो दुनिया शायद ही कभी देखती थी।

“अच्छी है।”

वृद्धि खुश होकर फिर उसकी गोद में बैठ गई।

उधर दूर खड़ी Rishika Wadhwa बेटे को देख रही थीं।

और उन्हें हमेशा की तरह वही अजीब feeling हुई।

अद्वय दुनिया में किसी के साथ इतना soft नहीं था।

सिर्फ वृद्धि के साथ।

बाकी सबके लिए वो distant था।
Cold।
Unapproachable।

लेकिन वृद्धि…

वो उसके अंदर का हर कठोर हिस्सा कुछ देर के लिए शांत कर देती थी।

“Dad ने बुलाया है।”

Riddarth Rathore कमरे में आते हुए बोला।

अद्वय ने नजर उठाई। “क्यों?”

“Important बात है शायद।”

दोनों नीचे गए।

हॉल में Shreyansh Wadhwa और Yatarth Rathore बैठे थे।

उनके चेहरे unusually serious थे।

अद्वय ने silently seat ले ली।

“अद्वय,” श्रेयंश बोले, “हमने decide किया है कि तुम और रिद्धार्थ आगे की पढ़ाई के लिए London जाओगे।”

पूरा कमरा कुछ सेकंड के लिए शांत हो गया।

रिद्धार्थ excited हो गया। “Seriously?!”

लेकिन अद्वय का चेहरा बिल्कुल expressionless था।

उसकी पहली नजर automatically वृद्धि पर गई।

वो floor पर बैठी dolls से खेल रही थी।

उसे अभी समझ भी नहीं था कि क्या कहा गया।

“कब?”
अद्वय की आवाज़ धीमी थी।

“दो महीने बाद।”

उसकी उंगलियाँ धीरे से tighten हुईं।

दो महीने।

मतलब… वो वृद्धि से दूर जाएगा।

उसके अंदर अचानक अजीब बेचैनी उठी।

इतनी तेज़ कि उसे खुद irritation होने लगी।

उस रात वो unusually quiet था।

राठौर मेंशन की balcony में खड़ा वो नीचे garden देख रहा था।

बारिश होने वाली थी।

हवा ठंडी थी।

लेकिन उसके अंदर कुछ heavy था।

“अद्वय?”

पीछे से छोटी-सी आवाज़ आई।

उसने पलटकर देखा।

वृद्धि दरवाज़े के पास खड़ी थी।

Pink night suit में।
बिखरे बाल।
नींद से भरी आँखें।

“आप यहाँ क्या कर रहे हो?”

वो कुछ सेकंड उसे देखता रहा।

फिर धीरे से बोला, “कुछ नहीं।”

वृद्धि उसके पास आ गई।

“मम्मा कह रही थीं आप कहीं जा रहे हो।”

उसकी आँखें तुरंत उस पर टिक गईं।

“किसने बताया?”

“मम्मा।”

Silence.

वृद्धि ने innocent आवाज़ में पूछा, “बहुत दूर?”

“हाँ।”

“क्यों?”

उसके पास जवाब नहीं था।

या शायद था… लेकिन वो समझा नहीं सकता था।

उसने बस इतना कहा, “पढ़ाई।”

वृद्धि कुछ सेकंड चुप रही।

फिर धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।

“मत जाओ ना।”

बस चार शब्द।

लेकिन उन चार शब्दों ने उसके अंदर सबकुछ हिला दिया।

उसकी नजर उनके जुड़े हाथों पर गई।

वही छोटी-सी पकड़।

वही feeling…

जो सालों पहले पहली बार हुई थी।

और अब पहले से कहीं ज्यादा dangerous बन चुकी थी।

“वापस आऊँगा।”

उसने पहली बार इतनी softness से कहा।

वृद्धि ने तुरंत पूछा, “Promise?”

अद्वय ने बिना सोचे जवाब दिया—

“तुम्हारे लिए हमेशा।”

अगले दो महीने बहुत जल्दी गुजर गए।

और हर गुजरते दिन के साथ अद्वय की बेचैनी बढ़ती गई।

वो हर छोटी चीज़ notice करने लगा।

वृद्धि कैसे हँसती है।
कैसे नाराज़ होती है।
कैसे उसके पीछे-पीछे घूमती है।
कैसे हर रात उसे “goodnight” बोलती है।

जैसे उसका दिमाग उसकी हर memory store कर लेना चाहता हो।

हमेशा के लिए।

जाने का दिन आ चुका था।

Airport crowded था।

रिद्धार्थ excitement में nonstop बोल रहा था।

लेकिन अद्वय unusually silent था।

उसकी नजर सिर्फ एक जगह थी—

वृद्धि।

वो अपने पिता के पास खड़ी थी।

आज पहली बार उसके चेहरे पर smile नहीं थी।

“आप सच में जा रहे हो?”
उसने धीमे से पूछा।

अद्वय उसके सामने आकर खड़ा हो गया।

“हाँ।”

“कब आओगे?”

“जल्दी।”

झूठ।

उसे पता था ये “जल्दी” सालों का होगा।

वृद्धि की आँखें हल्की भर गईं।

“मैं miss करूँगी आपको।”

उसके अंदर कुछ painfully tighten हुआ।

उसने धीरे से उसके सिर पर हाथ फेरा।

फिर पहली बार… बहुत ध्यान से उसे देखा।

जैसे वो उसका चेहरा याद कर लेना चाहता हो।

हर detail।

हर expression।

“किसी को परेशान मत करना।”

वृद्धि ने होंठ फुलाए। “मैं नहीं करती।”

उसके होंठों पर हल्की smile आई।

फिर उसने बहुत धीरे कहा—

“और किसी लड़के के ज्यादा close मत होना।”

सब लोग इसे मज़ाक समझकर हल्का हँस दिए।

लेकिन अद्वय serious था।

पूरी तरह।

वृद्धि confused होकर blink करने लगी। “क्यों?”

उसने जवाब नहीं दिया।

क्योंकि वो खुद उस जवाब से डरता था।

Announcement हुई।

उन्हें जाना था।

रिद्धार्थ आगे बढ़ गया।

लेकिन अद्वय वहीं खड़ा रहा।

कुछ सेकंड।

फिर अचानक उसने वृद्धि का हाथ पकड़ा।

कसकर।

इतना कसकर कि वो हल्का confuse हो गई।

उसकी dark आँखें सीधे उसकी आँखों में थीं।

“मुझे भूलना मत।”

वृद्धि तुरंत बोली, “कभी नहीं।”

और वही चीज़ उसके अंदर permanently बैठ गई।

उसने धीरे से उसका हाथ छोड़ा।

फिर बिना पीछे देखे चला गया।

लेकिन उसे पता नहीं था—

आज वो सिर्फ देश नहीं छोड़ रहा था।

वो अपने अंदर एक obsession लेकर जा रहा था…

जो दूरी के साथ खत्म नहीं होने वाला था।

बल्कि और खतरनाक बनने वाला था।


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